
पुरी: जगन्नाथ मंदिर: आस्था, परंपरा और विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा
ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर भारत के चार प्रमुख धामों में से एक है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण), बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। हर वर्ष आयोजित होने वाली भव्य रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं और देश-विदेश से भक्त इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनते हैं। रथ यात्रा के दौरान भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देते हैं, जो समानता, श्रद्धा और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है।
जगन्नाथ मंदिर की प्रमुख विशेषताएँ
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की काष्ठ (लकड़ी) से निर्मित प्रतिमाओं की पूजा की जाती है।
मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव द्वारा कराया गया था।
रथ यात्रा के लिए तीनों देवताओं के अलग-अलग विशाल लकड़ी के रथ हर वर्ष नए सिरे से तैयार किए जाते हैं।
पुरी की रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु स्वयं रथों की रस्सी खींचकर सेवा का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।
यात्रा के दौरान होने वाली ‘छेरा पहरा’ परंपरा में गजपति महाराज स्वर्ण झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं, जो सेवा और विनम्रता का संदेश देती है।
यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है।
“विश्व प्रसिद्ध पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा: जब भगवान स्वयं भक्तों के बीच आते हैं। आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम।”
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