शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर गणेशपुरी पहुंचे स्वामी शिवानंद जी महाराज, विभिन्न आश्रमों का किया भ्रमण

गणेशपुरी, कारीआम। शारदीय नवरात्र की पावन सप्तमी तिथि पर श्री सिद्धबाबा अद्वैत परमहंस आश्रम, बेलगहना के परम श्रद्धेय श्री श्री 108 श्री स्वामी शिवानंद जी महाराज अपने परिकर सहित गणेशपुरी, कारीआम स्थित पावन आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान स्वयंभू गणेश जी एवं मां आदिशक्ति काली जी का विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन किया तथा ज्योति कलश के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भी भक्तिभाव के साथ देवी-देवताओं के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित की। पूज्य श्री के आगमन से आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
प्राचीन आस्था और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है गणेशपुरी

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण गणेशपुरी, कारीआम धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक चेतना का विशिष्ट केंद्र है। बद्रीनाथ से रामेश्वरम जाने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित इस पावन भूमि में मां आदिशक्ति काली जी एवं भगवान स्वयंभू गणेश जी प्राचीन काल से विराजमान हैं। अनंत श्री विभूषित श्री श्री 1008 श्री स्वामी सदानंद जी महाराज परमहंस की पावन चरण-रज से पवित्र इस भूमि का सनातन परंपरा और साधना की दृष्टि से विशेष महत्व है। वनांचल की सुरम्य वादियों से घिरा यह तीर्थ श्रद्धालुओं को शांति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराता है। नवरात्र की सप्तमी पर पूज्य स्वामी शिवानंद जी महाराज का आगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक आनंद का अवसर बना।
पतंजलि आश्रम में भोजन-प्रसादी में हुए शामिल

गणेशपुरी आश्रम में पूजन-अर्चन के पश्चात पूज्य श्री बस्ती डोंगरी स्थित पतंजलि आश्रम पहुंचे। यहां आयोजित भोजन-प्रसादी में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। भारतीय सनातन संस्कृति में अन्नदान को महादान तथा जीव-सेवा को नारायण सेवा माना गया है। जरूरतमंदों को भोजन कराना, उनकी सेवा करना और मानवता के प्रति करुणा का भाव रखना भारतीय संस्कृति के मूल आदर्शों में शामिल है। इस आयोजन ने सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना को अभिव्यक्त किया।
जोगी गुफा और मानस तीर्थ सोनकुंड आश्रम का किया निरीक्षण

इसके पश्चात पूज्य स्वामी शिवानंद जी महाराज ने जोगी गुफा आश्रम का भ्रमण कर वहां की स्थिति का निरीक्षण किया। प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित जोगी गुफा अपनी मनोरम छटा, शांत वातावरण और प्राकृतिक झरने के लिए आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ों से गिरते झरने का दृश्य प्रकृति प्रेमियों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। यहां दूर-दूर से लोग प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंचते हैं।
इसके बाद पूज्य श्री मानस तीर्थ सोनकुंड आश्रम पहुंचे और वहां की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। विभिन्न आश्रमों में उनका आगमन आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण, साधना-परंपरा की निरंतरता तथा आश्रमों के सुव्यवस्थित संचालन के प्रति उनकी आत्मीयता को दर्शाता है।
गुरु-कृपा, सेवा और लोककल्याण का दिया संदेश

पूज्य श्री का यह मंगलमय प्रवास गुरु-तत्त्व के प्रति अटूट निष्ठा, सनातन संस्कृति के संवर्धन और लोककल्याण की भावना का प्रेरक संदेश बना। गुरु-कृपा से प्रेरित जीवन श्रद्धा, समर्पण, सेवा और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। ऐसे आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के अंतर्मन में भक्ति, सद्भाव और सेवा के संस्कारों को सुदृढ़ करते हैं।
इस अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरबा, पाली, रतनपुर, बिलासपुर, लोरमी, मुंगेली, कोटा, बेलगहना और पंडरिया सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त पूज्य श्री के साथ पहुंचे। भक्तों ने भगवान सदगुरु के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा नवरात्र के पावन धार्मिक उत्सव में सहभागिता की। संपूर्ण आयोजन के दौरान आश्रमों में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
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