
गुरु पूर्णिमा—भगवान सद्गुरु की कृपा, दर्शन, सान्निध्य और भागवत-भक्ति रूपी अमृत का पान करने का परम दिव्य अवसर
गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीव के आध्यात्मिक पुनर्जन्म का महापावन उत्सव है। यह वह मंगलमयी क्षण है जब भगवान सद्गुरु की असीम कृपा विशेष रूप से अपने शरणागत भक्तों पर बरसती है। इस दिन सद्गुरु के श्रीचरणों का दर्शन, उनका पावन सान्निध्य, उनकी दिव्य वाणी का श्रवण और उनके द्वारा प्रदत्त भगवन्नाम का स्मरण साधक के जीवन को परम कल्याण की दिशा प्रदान करता है।

भगवान सद्गुरु ही जीव के अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर उसे भगवान की ओर अग्रसर करते हैं। उनकी कृपा से ही हृदय में भागवत-भक्ति का उदय होता है, श्रद्धा दृढ़ होती है, प्रेम जागृत होता है और जीवन का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट होता है। संसार के असंख्य आकर्षण जहाँ मन को क्षणिक सुख देते हैं, वहीं सद्गुरु का सान्निध्य आत्मा को शाश्वत शांति, आनंद और परमात्मा के प्रेम का अनुभव कराता है।

गुरु पूर्णिमा का यह परम पावन दिवस भगवान सद्गुरु की अमृतमयी कृपा, दिव्य दर्शन, पावन चरण-स्पर्श, मंगलमयी वाणी और भागवत-भक्ति रूपी अमृत का पान करने का दुर्लभ अवसर है। जो भक्त इस दिन श्रद्धा, विनय और पूर्ण समर्पण के साथ सद्गुरु की शरण ग्रहण करता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। सद्गुरु की कृपादृष्टि से असंख्य जन्मों के संस्कार निर्मल होते हैं, हृदय में भगवत्प्रेम का दीप प्रज्वलित होता है और मोक्ष का मार्ग सहज एवं सुगम बन जाता है।
।। श्री अद्वैत परमहंस आश्रम बेलगहना।।
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