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मुंगेली जिले में धार्मिक गुरुओं ने बाल विवाह उन्मूलन के लिए लिया संकल्प

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मुंगेली जिले में धार्मिक गुरुओं ने बाल विवाह उन्मूलन के लिए लिया संकल्प

जितेन्द्र पाठक की रिपोर्ट

मुंगेली। जिले में बाल विवाह रोकथाम और जागरूकता को लेकर धार्मिक गुरुओं ने एकजुट होकर बड़ा संकल्प लिया है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन संस्था और सहयोगी कृषक सहयोग संस्थान द्वारा 12 से 14 सितंबर तक आयोजित राष्ट्रीय अंतर धार्मिक सप्ताह के दौरान विभिन्न मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारों के धर्मगुरुओं से संवाद कर अभियान के उद्देश्य साझा किए गए। धर्मगुरुओं ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है और इसे जड़ से खत्म करना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की कि लड़कियों की शादी 18 वर्ष और लड़कों की शादी 21 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही की जाए। बाल विवाह से सबसे अधिक नुकसान लड़कियों को झेलना पड़ता है। नाबालिग उम्र में विवाह होने से उन्हें शिक्षा से वंचित होना पड़ता है, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं और घरेलू हिंसा तथा शोषण की संभावना भी अधिक रहती है। वहीं कम उम्र में मातृत्व के चलते मां और शिशु दोनों की जीवन खतरे में पड़ जाती है। धर्मगुरुओं ने जनता से बाल विवाह न करने और न होने देने का आह्वान किया। उनका कहना था कि बाल विवाह न केवल लड़कियों बल्कि लड़कों पर भी नकारात्मक असर डालता है, यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है और देश की प्रगति में बाधक है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन वर्ष 2022 से बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और विकास के लिए देश तथा विश्व 39 देशों में काम कर रही है और बाल विवाह को रोकने के लिए विभिन्न पहल कर रही है। अभियान के अंत में सभी धर्मगुरुओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे बाल विवाह नहीं कराएंगे और मुंगेली जिला को बाल विवाह मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

Ashwani Agrawal
मुंगेली / लोरमी न्यूज़
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