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रतनपुर प्रवास के दौरान पूर्व सैनिक परिवार की स्थिति पर संवेदनशील पहल, समाज के सक्षम एवं संवेदनशील नागरिकों से भी अपील की कि वे आगे आकर पूर्व सैनिक परिवार की सहायता करें। | उप मुख्यमंत्री अरुण साव की घोषणा के बाद कोटा को मिला नगर पालिका का दर्जा, अधिसूचना जारी,जनता से किया वादा 10 माह में निभाया | मुंगेली में भारतीय सेना में चयनित अग्निवीर  युवाओं का भव्य सैनिक सम्मान समारोह संपन्न | नगर पालिका परिषद के प्रथम नव निर्वाचित अध्यक्ष सुजीत वर्मा का जन्मदिन नाका चौक पर भाजपा नेताओं द्वारा केक काट कर मनाया गया | लोरमी के 50 बिस्तर अस्पताल में प्राइवेट एम्बुलेंस संचालकों की दादागिरी, वीडियो वायरल, डॉक्टरों से बदसलूकी का आरोप | नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने वाले आरोपी को उसके घर ग्राम चालान से गिरफ्तार कर भेजा गया जेल। |
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शिव आराधना में डूबे श्रद्धालू

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लोरमी-बाजार पारा गुप्ता परिवार द्वारा आययोजित महापुराण कथा में कथा वाचक पंडित तारेंद्र महराज ने तृतीय ब्रह्म सृष्टि निर्माण एवं सन्ध्याकाल का वर्णन किया।

तारेंद्र महाराज ने कथा का व्याख्या करते हुए कहा कि ब्रह्मा भगवान ब्रह्मा जी किस प्रकार से सृष्टि का विस्तार करने के लिए कामदेव, अंगिरा,मरीचि, अत्री , कश्यप आदि आदि महात्माओं को पैदा किया वह संसार का संचालन हेतु संसार का विस्तार बढ़ सके इसलिए भगवान ब्रह्मा जी ने कामदेव को भी पैदा किया।

उन्होंने बताया कि लेकिन रामदेव जी अपने पिता पर ही काम बढ़ सदा जिससे कि भगवान ब्रह्मा के प्रति मन में अपनी बिटिया संध्या देवी के प्रति विकार उत्पन्न हुआ जिस धर्म और चारों वेद भगवान शंकर जी का आह्वान किया भगवान शंकर जी में काल भैरव को पैदा किया जिससे कि भगवान ब्रह्मा के एक शिष्य कट गए महाराज जी ने कहा कि जिस काल भैरव को ब्रह्म हत्या का श्राप लगा ब्रह्म हत्या को फिर कई भाग पर बांटा गया मुख्यतः प्रथम भाग मुसर भूमि को दिया गया , दूसरा भाग वृक्ष को दिया गया तीसरा भाग जल के बुदबुदे फेन को दिया चौथा भाग अशुद्ध काल में नारियों को देखना ही ब्रह्म हत्या का श्राप श्राप कहा गया।
इसके खंडन करते हुए और अन्य भाग पर और बांटा गया जिसमें से कथा पर बाधा बन जाना सोए हुए व्यक्ति को व्यक्ति को लात मार के उठा देना कोई सज्जन व्यक्ति का अपमान आदि कर देना यह भी ब्रह्म हत्या के प्रतिरूप कह गए हैं।

महाराज जी ने कहा कि संध्या देवी अपने इस देह का त्याग करने के लिए घनघोर जंगल में जाकर शिवमय हो गई भगवान शंकर से वरदान मांगी कि मैं आकाश में विलीन हो जाऊ और आज संध्या माता आकाश में विलीन हुए।
जिससे कि हमको इस संसार में तीन प्रकार के संध्या प्राप्त हुए प्रथम संध्या प्रातः काल द्वितीय संध्या मध्यांतर एव तृतीय शायम काल को कहे जाते हैं इस काल में जब तप का इत्यादि का बड़ा महत्व है।
महराज जी ने बताया कि 26 जनवरी को शिव एवं शक्ति का मिलन होगा,बरात निकाल कर शिवपार्वती विवाह के लिए सभी को आमंत्रित किये।
इस अवसर पर नगर पंचायत उपाध्यक्ष अनुराग दास, ज्योति दास, सन्तोष अग्रवाल, चन्द्र ज्योत्सना दास, छेदी लाल गुप्ता, पत्रकार नूतन गुप्ता, पुरुषोत्तम गुप्ता, नन्दकिशोर गुप्ता, हेमचन्द गुप्ता, लूणकरण खत्री, मिथलेश केशरवानी, जयलाल केशरवानी, धरम लाल केशरवानी, सुखलाल केशरवानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धलु उपस्थित रहे।

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