

जितेंद्र पाठक
लोरमी – मानस मंच लोरमी में चल रही श्री राम कथा के अष्टम दिवस की शुरुआत करते हुए चिन्मयानंद बापू कहां कि मानव जीवन का लक्ष्य परमात्मा है और लक्ष्य है मानव का तन मिलना यह सरल नहीं है देवताओं के लिए मानव तन मिलना बडा दुर्लभ है परमात्मा ने एक चांस देने के लिए हमें वहां से उठाया भगवान की कितनी बड़ी करुणा है कितनी बड़ी कृपा है कि हमें शरीर दिया बुद्धि दिया हाथ पर दिए आंखें दी मन दिया बापू ने कहा भोग जरूरी है लक्ष्य नहीं मानव तन का फल विषय नहीं है भगवान के भजन के लिए हमें कष्ट उठाना पड़े थोड़ा कर लो भगवान का चिंतन भगवान का सुमिरन जरूर करें जगत का कार्य न हो पाए तो चिंता की बात नहीं जीवन का लक्ष्य केवल भजन है भगवान राम के पद चिन्ह से हमें राम कथा हमें यही सीख रही है मानव को चाहिए चिंतन करें चिंता नहीं हम कथा तो जरूर सुनते हैं मनन नहीं करते चिंतन नहीं करते राम कथा समर्थ वान है भगवान के सामने हम जाते हैं तो केवल भूसा ही मांगते हैं इसलिए भगवान वही देते हैं भगवान के सामने हम जाएं मोक्ष मांगे मोक्ष दुर्लभ नहीं है मन में मोच्छ का भाव जागना चाहिए हमें संत के पास जाकर यही मांगना चाहिए कि भवसागर पार हो जाए यही कामना करना चाहिए संसार की वस्तुएं की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए कथा के क्रम को आगे बढ़ते हुए बापू ने कहा जैसे भगवान का विवाह हुआ इसी पद्धति से चारों भाइयों का विवाह हुआ भगवान विदाई करके अयोध्या वापस आए माता सीता आने पर अयोध्या को सजाया गया माता कौशल्या राम के कच्छ में गई राम से बोली अपने तड़का को मारा अहिल्या को तारा जो बड़े-बड़े धनुष ने उठा सके उसे धनुष को खेल-खेल में अपने तोड़ दिया आप मानव नहीं हो सकते आप परम ब्रह्म है मैं आपको पहचानती हूं हमारे आपके कितने दिन भगवान के दर्शन के छूट जाते हैं जब हमारा जन्मदिन आता है हम खुशियां मनाते हैं किस बात की खुशियां मेरा उम्र कम हुआ बापू ने कहा कि प्रहलाद का जन्मदिन आता था तो वह रोते थे की इतना दिन प्रभु मेरी उम्र कम हो गई श्याम बिना व्यापम यूं ही पुकार परेशान परमात्मा का सुमिरन ना हो पाए परमात्मा का भजन ना हो पाए उससे बड़ा दुख कोई और नहीं जिंदगी कथा में बापू ने कहा हनुमान जी महाराज सबसे बड़ा दुख वही है जब तक सुमिरन भजन ना हो सबसे बड़ा अनमोल है मानव तन यह जीवन मिले या ना मिले क्या भरोसा भजन करने का असली उम्र बाल अवस्था है क्या भरोसा इस जिंदगी का कब सांस रुक बापू ने कहा कथा में आप सभी को जो 9 दिन बीते हैं पूर्ण अक्षरों में लिखा जाएगे धन की तीन गति होती है दान भोग और नाश भगवान राम में विवाह करके आए महाराज दशरथ के साथ उनके काम में हाथ बताने लगी युवाओं को चाहिए कर्म सील बन आलसी नहीं होना चाहिए सुबह जल्दी घर के काम में पिता का हाथ बताएं अपनी जिम्मेदारी समझे इसी क्रम में संक्षेप में कथा को आगे बढ़ते हुए अनेक अनेक प्रसंगों को सुनते हुए बापू ने कहा कि कहीं तीर्थ में जो संतों को भोजन कर दो गौ माता को भोजन दे दो उनकी सेवा करो यह परमार्थ के कार्य अवश्य करनी चाहिए गरीबों की सहायता करें यह दान परमार्थ कहा जाता है भगवान ने अगर हमें धन दिया है उसे धन का हम सदुपयोग करें उपयोग न करें सदुपयोग करें आप जो भी धन कमाओ उसका 10% परमार्थ में लगाये
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