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अचानकमार रिजर्व( औरपानी) में प्रबंधन कर रहा है गिद्धों के संरक्षण व संवर्धन पर कार्य,100 किलोमीटर एरिया में 490 से अधिक गिद्ध, इनमें विदेशी भी

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ashwani agrawal

गिद्दों की प्रजातियों को संरक्षित करने की पहल

अचानकमार रिजर्व में प्रबंधन कर रहा है गिद्धों के संरक्षण व संवर्धन पर कार्य

100 किलोमीटर एरिया में 490 से अधिक गिद्ध, इनमें विदेशी भी

लोरमी। विलुप्त हो रही गिद्धों की प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए शासन पहल कर रही है। इसके तहत अब अचानकमार टाइगर रिजर्व के औरापानी सहित करीब 100 किलोमीटर के एरिया में मौजूद 490 से अधिक गिद्ध हैं, जिसमें इंडियन के साथ विदेशी गिद्ध भी शामिल हैं। इन सभी गिद्धों के संरक्षण और संवर्धन पर एटीआर प्रबंधन ने कार्य करना शुरु कर दिया है।

गिद्धों के व्यवहार और रहवास के संबंध में स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी प्राप्त करने के लिए पहली बार गिद्धों को जीपीएस टैगिंग करने की अनूठी पहल शुरु की गई है। एटीआर प्रबंधन के अनुसार देश में पाई जाने वाली गिद्धों की 9 प्रजातियों में से तीन प्रजातियों पर संकट मंडरा रहा है। इन 9 प्रजातियों में से 7 प्रजातियां हिमालयन ग्रिफॉन, यूरोशियन ग्रिफॉन, सिनरस

जैसी प्रवासी प्रजातियां व लंबी चोंच वाले गिद्ध, सफेद पूंछ वाला राज गिद्ध और

इजीप्शियन गिद्ध जैसे प्रवासी प्रजातियां वर्तमान में पाई जाती हैं। सफेद पूंछ वाला गिद्ध जिप्स बेंगालेसिस, भारतीय गिद्ध जी इंडिकस और पतली चोंच वाले गिद्ध जी टेन्यूरोस्ट्रस की आबादी में 1990 के दशक के मध्यम तेजी से गिरावट आई है। इसी तरह अचानकमार टाइगर रिजर्व में भी दो प्रजातियों लांग बिल्ड वल्चर और इंडियन वल्चर के 100 से अधिक गिद्ध हैं, जो एटीआर के औरापानी और 100 किलोमीटर एरिया में विचरण करते रहते हैं।

इन दोनों प्रजातियों के गिद्धों पर एटीआर के कर्मचारी लगातार निगरानी रखते हैं, लेकिन कभी-कभी गिद्ध इधर-उधर भटककर भी चले जाते हैं। इसकी वजह से उन्हें खोजबीन करने में परेशानी होती है। इसे देखते हुए अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने गिद्धों को जीपीएस सिस्टम टैग लगाने का निर्णय लिया है।

औरापानी में 7 प्रजाति के 490 से अधिक गिद्ध

वर्तमान में अचानकमार टाइगर रिजर्व के लोरमी बफर के औरापानी सहित क्षेत्र के 100 किलोमीटर के दायरे में 7 प्रजातियों के करीब 490 से अधिक गिद्धों की संख्या है। प्रदेश में एटीआर पहला गिद्ध के संरक्षण और संवर्धन का क्षेत्र है, जहां इसके स्थापना हेतु प्रोजेक्ट का संचालन किया गया है। इसके अलावा गिद्धों की मानिटरिंग के लिए स्थानीय ग्रामीणों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

विदेश से आएगा टैग

प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में फारेस्ट कंजर्वेशन पर प्रोजेक्ट एटीआर में चल रहा है। इसके तहत गिद्ध को प्लेटफार्म टर्मिनल के लिए टैग से ट्रैकिंग करने के लिए जीपीएस सिस्टम लगाने का निर्णय लिया गया है, जिसे विदेश से मंगाया जाएगा। इसके लिए गोव्र्व्हमेंट आफ इंडिया से अनुमति लेनी पड़ती है, जिसमें एटीआर प्रबंधन को एनओसी प्राप्त हो गई है। अब केवल गोव्हमेंट आफ इंडिया की संस्थान डीजीएफटी की अनुमति लेनी बाकी है।

सभी प्रमुख विभागों से चर्चा

प्रदेश स्तर पर एटीआर के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है कि यहां औरापानी जैसे क्षेत्र में गिद्धों के संरक्षण क्षेत्र स्थापना हेतु प्रोजेक्ट का संचालन किया गया है। गिद्धों के संरक्षण और संवर्धन के लिए उन्हें टैग लगाने का काम होगा। एटीआर के अलावा इंद्रावती, गुरुघासीदास टाइगर रिजर्व के अतिरिक्त जिस जिस स्थान पर गिद्ध पाए जाते हैं वहां सभी स्थानों पर गिद्धों के संरक्षण व संवर्धन का कार्य किया जाना है। इसके लिए सभी प्रमुख विभागों के साथ चर्चा भी हो गई है।

  • यूआर गणेश, डिप्टी डायरेक्ट, एटीआर
Ashwani Agrawal
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