डॉ. श्वेता के शोध एआई संचालित मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण उपकरण को केंद्र से मिला पेटेंट

बिलासपुर शासकीय नवीन महाविद्यालय, सकरी की प्राध्यापिका डॉ. श्वेता झील जायसवाल ने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है। उनके अविष्कार “पोर्टेबल एआई संचालित मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण एवं अनुशंसा उपकरण” को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने पेटेंट दे दिया है। यह अत्याधुनिक उपकरण एक पोर्टेबल, एआई आधारित मृदा विश्लेषण यंत्र है, जो बहु-पैरामीटर मृदा परीक्षण, एआई डेटा विश्लेषण और क्लाउड कनेक्टिविटी जैसी उन्नत तकनीकें इसमें शामिल हैं। इस कॉम्पैक्ट और उपयोग में सरल यंत्र में एम्बेडेड सेंसर लगे हैं, जो मिट्टी की नमी, तापमान, पीएच मान, और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम जैसे प्रमुख पोषक तत्वों का सटीक विश्लेषण करते हैं। इस परियोजना में कृषि अधिकारी अभय पाल ने सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. जायसवाल पिछले 20 वर्षों से शिक्षा एवं अनुसंधान क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनका शोध मुख्यतः मृदा भौतिकी पर केंद्रित रहा है। उनके 25 से अधिक शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जरनल में प्रकाशित हो चुके हैं। साथ ही उन्होंने 15 से अधिक पुस्तकों का लेखन एवं संपादन भी किया है। डॉ. श्वेता जायसवाल ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पति झील जायसवाल, जनगणना अधिकारी (कलेक्टर कार्यालय, बिलासपुर) को दिया है।
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