जितेंद्र पाठक
अपात्र पर शिव कृपा कर देते है- तारेंद्र महाराज
लोरमी- नगर के बाजार मोहल्ले में गुप्ता परिवार के द्वारा आयोजित श्री शिवमहापुराण द्वितीय दिवस कथा वाचक पंडित तारेंद्र महराज ने नारद मुनि एवं विश्वमोहनी के सुमधुर कथा विस्तृत रूप से बताये। नारद जी एवं विश्वमोहनी की जीवंत झांकी ने श्रद्धलुओं का मोह लिया।

तारेंद्र महाराज ने कहा श्री सूत जी महाराज ने कहा है, कि श्री शिव महापुराण में 12 संहिता हुआ करता था, जो कि भगवान व्यास जी ने सिर्फ जनकल्याण के लिए आने वाला कलयुग का उद्धार हो सके कलयुगी प्राणी इनको चिंतन मनन स्वाध्याय कर सके इसलिए विस्तृत शिव महापुराण को संक्षिप्त करते हुए सात संहिता पर स्थापित कियक।
जिसके द्वारा हम सब लोग आज अपने पाप से मुक्त हो रहे हैं ,

महाराज जी ने कहा कि शिव महापुराण गंगा की भांति है गंगा भारत भूमि के एक भाग को पवित्र करती है परंतु शिव कथा रूपी गंगा परम पावनी है, पूरे भूखंड भाग को पवित्र करने में लगी हुई है।
शिव कथा को सुनकर के अपात्र भी पात्र बन जाते हैं , जो योग्य नही होते हैं, वह भी योग सुयोग्य बन जाते हैं।
महाराज जी ने बताया कि भगवान शंकर के माया से पूरा संसार व्याप्त है, भगवान शिव स्वयं मायापति है , प्राणी को चाहिए मायापति का संग करना चाहिए ,जिसने मायापति का विशेष कृपा हो जाए जैसे कि नारद जी ने माया को जीत कर नारद जी महाराज को मद हो गया। भगवान शिव को मद अहंकार द्वेष, अप्रिय है।
भगवान शंकर जी ने लीला करते हुए नारद जी को भगवान विष्णु के पास भेजे वहा भगवान विष्णु जी ने बार-बार समझाने पर भी नारद जी जंजीर से बंधा हुआ अहंकार मुक्त नहीं हो पाया।
आखिरकार सीलनिधि राजा की बिटिया विश्व मोहनी के प्रेम में फंस करके भगवान नारायण से उनका रूप मांगने के लिए तत्पर हो गए भगवान नारायण उनको बंदर सा मुख प्रदान किया।

भगवान नारायण अपने भक्तों का हमेशा हित चाहते हैं , इसलिए भगवान नारायण अपने भक्त की रक्षा करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
महाराज जी ने कहा कि नारद जी ऐसे पात्र हैं, जो आज्ञान को दूर करने वाला है। और नारद जी के दर्शन होने के बाद उसे पात्र को भगवान का दर्शन स्वत ही हो जाता है, उसे काल में महाराज जी ने कहा कि ब्रह्मण्ड के प्रथम पत्रकार के रूप में जाने जाते है।
इस अवसर पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष अंजना दास, पार्षद-चन्द्रकला दास वैष्णव, छेदी लाल गुप्ता, गिरधारी लाल गुप्ता, पत्रकार नूतन गुप्ता, सीएल गुप्ता,पुरुषोत्तम गुप्ता, नन्दकिशोर गुप्ता, मंनोज गुप्ता, आनंद गुप्ता, सुखलाल, वासु गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शिवभक्त उपस्थित रहे।
